पानी और मिट्टी में मिलने वाला ‘डोंका’ बना मुसहर परिवारों की रोजी-रोटी का सहारा
सपहा-कसया मार्ग पर डोंका चुनकर बेच रहे परिवार, करीब 200 रुपये किलो तक मिल रहा भाव
कुशीनगर। पानी और मिट्टी में पाए जाने वाले एक जलीय जीव, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘डोंका’ कहा जाता है, को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे पौष्टिक मानते हैं और बीमारी के बाद शरीर में ताकत लौटाने के लिए खाने की सलाह दिए जाने की बात कहते हैं। हालांकि इसके औषधीय गुणों को लेकर चिकित्सकीय सलाह प्रमाणित स्रोत के आधार पर ही मानी जानी चाहिए।
कुशीनगर जनपद में सपहा-कसया मार्ग के आसपास मुसहर समाज के कई परिवार डोंका चुनकर अपनी आजीविका चला रहे हैं। सुबह से ही परिवार के सदस्य पानी और मिट्टी वाले स्थानों पर डोंका तलाशते हैं। इसके बाद उसे फोड़कर साफ किया जाता है और स्थानीय बाजार में बिक्री के लिए ले जाया जाता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक डोंका करीब 200 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है। दिनभर मेहनत के बाद होने वाली यही कमाई कई परिवारों के घरेलू खर्च का प्रमुख सहारा बनती है।
इन परिवारों के लिए डोंका महज एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का जरिया है। बदलते मौसम और बाजार की मांग के बीच यह पारंपरिक काम आज भी कई परिवारों की जिंदगी से जुड़ा हुआ है।
सच्ची रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश

