बासी लिट्टी-चोखा परोसने का आरोप, खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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बासी लिट्टी-चोखा परोसने का आरोप, खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

बोभर ब्रिज पश्चिमी स्थित फेमस लिट्टी चोखा एवं जलपान गृह में पुराने भोजन को गर्म कर ग्राहकों को देने का दावा, जांच की मांग

कप्तानगंज फेमस लिट्टी चोखा के नाम पर धोखा

कप्तानगंज–परतावल बाजार मार्ग | कुशीनगर।

खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और ग्राहकों की सेहत की जिम्मेदारी संभालने वाला खाद्य सुरक्षा विभाग आखिर अपनी जिम्मेदारी कितनी गंभीरता से निभा रहा है? कप्तानगंज–परतावल बाजार मार्ग पर बोभर ब्रिज के पश्चिमी छोर पर स्थित फेमस लिट्टी चोखा एवं जलपान गृह को लेकर उठे सवालों ने विभागीय निगरानी और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब नौ बजे कुशीनगर से महराजगंज जा रही पत्रकारों की एक टीम नाश्ता करने के लिए उक्त जलपान गृह पर पहुंची। पत्रकारों का आरोप है कि वहां रात में तैयार की गई सब्जी को गर्म करके ग्राहकों को परोसा जा रहा था। लिट्टी भी पहले से बनी हुई थी, जिसे गर्म करके खिलाया जा रहा था। वहीं, दुकान के रैक में रखी मिठाइयों की ताजगी और गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए। पत्रकारों का दावा है कि वहां प्रदर्शित मिठाइयां तीन दिन पुरानी थीं। हालांकि, इन खाद्य पदार्थों की वास्तविक उम्र और गुणवत्ता की पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद ही हो सकती है।

ग्राहकों की सेहत से खिलवाड़ का आरोप

खाद्य कारोबार में साफ-सफाई, सुरक्षित भंडारण और भोजन की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि किसी प्रतिष्ठान पर पुराने भोजन को अनुचित तरीके से सुरक्षित रखकर दोबारा गर्म करने या खराब हो चुके खाद्य पदार्थों को ग्राहकों को परोसने की शिकायत मिलती है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सवाल यह है कि सार्वजनिक आवागमन वाले मार्ग पर संचालित इस तरह के जलपान गृहों की नियमित जांच हो रही है या नहीं?

पत्रकारों ने आरोप लगाया कि प्रतिष्ठान पर भोजन को लेकर आपत्ति जताने पर संबंधित लोगों का रवैया विवादपूर्ण हो गया। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह ग्राहकों के प्रति कारोबारी व्यवहार पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।

विभागीय संरक्षण की चर्चा, लेकिन जांच जरूरी

स्थानीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, संबंधित प्रतिष्ठान को विभागीय संरक्षण प्राप्त होने का कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। ऐसे में विभागीय मिलीभगत के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही की जा सकती है। फिर भी, यदि खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की शिकायत है, तो विभाग को मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

कप्तानगंज क्षेत्र में एसडीएम और तहसीलदार सहित संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से भी अपेक्षा है कि वे शिकायत मिलने पर खाद्य सुरक्षा विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर भीड़भाड़ वाले बाजारों और प्रमुख मार्गों पर स्थित खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच सुनिश्चित कराएं।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार राय की कार्यप्रणाली को लेकर भी शिकायत सामने आई है। आरोप है कि अधिकारी कार्यालय में बैठकों में व्यस्त रहते हैं और फोन करने पर संपर्क नहीं हो पाता। शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि सवाल पूछने पर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष लिया जाना आवश्यक है।

खाद्य सुरक्षा विभाग का दायित्व केवल कार्यालय में बैठकर कागजी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, नमूना संग्रह, नियमों के अनुपालन की जांच और उपभोक्ताओं की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई करना भी है।

अब जांच और कार्रवाई का इंतजार

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या संबंधित जलपान गृह में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच होगी? क्या मिठाइयों और तैयार भोजन के नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला में जांच कराई जाएगी? और क्या खाद्य सुरक्षा विभाग शिकायतों पर अपनी कार्रवाई सार्वजनिक करेगा?

मांग यह है कि संबंधित प्रतिष्ठान का निष्पक्ष निरीक्षण कराया जाए, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच हो और अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार राय से भी शिकायतों पर उनका पक्ष लेकर विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

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