खुदुरा गांव में काले बंदरों का बढ़ता आतंक, 20 दिनों में आधा दर्जन से अधिक लोग हो चुके हैं घायल।


खुदुरा गांव में काले बंदरों का बढ़ता आतंक, 20 दिनों में आधा दर्जन से अधिक लोग हो चुके हैं घायल।


मजदूरी कर रहे सुरेश यादव पर अचानक हमला, हाथ में गंभीर चोट; डॉक्टरों ने लगाए 7 टांके।
वन विभाग बेपरवाह, बचाव की कोई व्यवस्था नहीं; एंटी-रेबीज इंजेक्शन की कमी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश।


कुशीनगर। रविन्द्र नगर धूस थाना क्षेत्र के खुदुरा गांव में काले बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को मकान निर्माण कार्य में लगे एक मजदूर पर खूंखार बंदर ने हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया। गंभीर रूप से घायल मजदूर का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है, जहां उसके हाथ में 7 टांके लगाए गए हैं।
जानकारी के अनुसार शाहपुर कलवा पट्टी निवासी सुरेश यादव (35 वर्ष), पुत्र जदुनंद यादव खुदुरा गांव में एक मकान की छत ढलाई के कार्य में मजदूरी कर रहे थे। इसी दौरान अचानक एक आक्रामक काले बंदर ने उन पर हमला कर दिया और उनके हाथ को बुरी तरह नोच डाला। साथियों ने किसी तरह उन्हें बचाया और जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था, जिसके कारण घायल को गोरखपुर जाकर इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी गई। इससे स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार पिछले करीब 20 दिनों में काले बंदरों के हमले में आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। इनमें 84 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक रमेश मिश्रा, उनके पुत्र सत्य प्रकाश मिश्रा, विपिन सिंह, झब्बर मिश्रा, बल्लम प्रताप सिंह तथा चंदन मिश्रा सहित कई ग्रामीण शामिल हैं। सबसे अधिक दहशत बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में है। लोग घरों से बाहर निकलने और खेतों में जाने से भी डरने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में काले बंदरों ने स्थायी डेरा बना लिया है और आए दिन लोगों पर हमला कर रहे हैं। इसके बावजूद वन विभाग पूरी तरह बेपरवाह बना हुआ है। न तो बंदरों को पकड़ने की कोई कार्रवाई की जा रही है और न ही ग्रामीणों को किसी प्रकार की बचाव या राहत सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे लोगों में विभाग के प्रति भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई करते हुए काले बंदरों को पकड़ने तथा गांव को उनके आतंक से मुक्त कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।


रिपोर्ट: के. एन. साहनी
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