विशेष रिपोर्ट
जनता को जानकारी देना सरकार का कर्तव्य, तभी योजनाओं का मिलेगा पूरा लाभ
के.एन. साहनी, लखनऊ
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार का सबसे बड़ा दायित्व केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनकी जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी है। जब तक आम नागरिक को किसी योजना, कानून या सरकारी सुविधा की सही जानकारी नहीं होगी, तब तक वह उसका लाभ नहीं उठा सकेगा।
केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं, छात्रों और गरीब वर्ग के लिए अनेक योजनाएं संचालित करती हैं। इन योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्हें इन योजनाओं की जानकारी तक नहीं है। कई बार पात्र व्यक्ति केवल जानकारी के अभाव में लाभ से वंचित रह जाता है।
सूचना एवं जनसंपर्क तंत्र का उद्देश्य सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना है। इसके लिए समाचार पत्रों, सोशल मीडिया, जनसभाओं, ग्राम चौपालों और प्रचार वाहनों का उपयोग किया जाता है। बावजूद इसके, कई गांवों में लोगों को यह नहीं मालूम कि किस योजना के लिए आवेदन कहां करना है, पात्रता क्या है और लाभ कैसे प्राप्त होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्राम पंचायत स्तर पर नियमित जागरूकता अभियान, सूचना शिविर और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तो योजनाओं की पहुंच अधिक प्रभावी हो सकती है। ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, लेखपाल और संबंधित विभागों की भी जिम्मेदारी है कि वे लोगों को समय-समय पर योजनाओं की जानकारी दें।
सरकार की किसी भी योजना की सफलता उसके बजट से नहीं, बल्कि लाभार्थियों तक उसकी पहुंच से तय होती है। यदि जानकारी का अभाव बना रहता है तो योजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि सूचना का अधिकार केवल दस्तावेजों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक नागरिक तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचे।
आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार और प्रशासन सूचना के अंतिम छोर तक पहुंचने की व्यवस्था को और मजबूत करें, ताकि कोई भी पात्र नागरिक केवल जानकारी के अभाव में अपने अधिकारों और सुविधाओं से वंचित न रहे।
(लेखक: के.एन. साहनी, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ)



