गोरखपुर: ‘पूर्वांचल गांधी’ का बड़ा ऐलान, गोविवि में 10 जून से आमरण अनशन, विवि प्रशासन पर ₹10 करोड़ का मानहानि केस!

सच्ची रिपोर्ट उत्तर प्रदेश
ब्रेकिंग न्यूज़ | सबसे तेज, सबसे सटीक

गोरखपुर: ‘पूर्वांचल गांधी’ का बड़ा ऐलान, गोविवि में 10 जून से आमरण अनशन, विवि प्रशासन पर ₹10 करोड़ का मानहानि केस!


गोरखपुर (sacchi report Bureau): दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (Gorakhpur University) का प्राचीन इतिहास विभाग एक बार फिर बड़े धमाके के साथ सुर्खियों में है। विश्वविद्यालय के पूर्व शिक्षक और ‘पूर्वांचल गांधी’ के नाम से मशहूर डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ, महामहिम राज्यपाल और उच्च शिक्षा मंत्री को ‘अर्जेंट लेटर’ भेजकर आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। डॉ. मल्ल ने साफ किया है कि अगर 10 जून तक उनकी प्रोफेसर पद पर पुनः बहाली नहीं होती है, तो वह 5 सत्याग्रहियों के साथ विवि परिसर में आमरण अनशन शुरू कर देंगे।

​ “सिस्टम गूंगा, बहरा और अंधा हो चुका है”
​डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने अपने पत्र में तीखे तेवर दिखाते हुए प्रशासन पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा:
​”सत्यपथ इकलौता मार्ग है जिस पर मैं चलता हूं। मुझे सत्य और न्याय चाहिए, संविधान चाहिए—न कम, न अधिक।”
​पिछले साल भी 15 से 20 जुलाई के बीच वह अनशन कर चुके हैं। राजभवन से आदेश जिलाधिकारी गोरखपुर तक आया, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

योग्यता का कत्ल: “DU का PHD धारक बाहर, नकल वाले अंदर!”
‘पूर्वांचल गांधी’ ने विवि प्रशासन पर साल 2008 में साजिश के तहत और कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार कर उन्हें नौकरी से निकालने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। उन्होंने अपनी योग्यता को चुनौती देने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा:
“मैं उतना ही योग्य हूं जितना भारत का राजपत्र और UGC रेगुलेशन। मेरे पास दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की पीएचडी, UGC NET-JRF और MA फर्स्ट क्लास की डिग्री है। मेरी किताब ‘पुरातत्व की अनुसंधान प्रणाली’ आज विवि में छात्र पढ़ रहे हैं। फिर भी मुझे बाहर रखा गया, जबकि साहित्यिक चोरी (Plagiarism) और बिना रिसर्च मेथाडोलॉजी वाले लोग आज विभाग में आचार्य, हेड और डीन बने बैठे हैं।”

माo योगी आदित्यनाथ मुख्य मंत्री उत्तर प्रदेश

विवि के ‘काले कारनामों’ के खिलाफ डॉ. मल्ल की 5 बड़ी मांगें:
सीबीआई जांच (CBI Inquiry): विभाग के सीनियर प्रोफेसरों (प्रो. राजवंत राव, प्रो. दिग्विजय नाथ मौर्या, प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी) की नियुक्ति और उनकी पीएचडी की जांच देश के जीवित इंडोलॉजिस्ट प्रो. जयमल राय (94 वर्ष) की देखरेख में CBI से कराई जाए।
पुनः बहाली और एरियर: अगस्त 2003 की नियुक्ति के आधार पर उन्हें वरिष्ठता के साथ प्रोफेसर पद पर बहाल किया जाए और पूरा बकाया वेतन ब्याज सहित दिया जाए।
₹10 करोड़ का हर्जाना: टर्मिनेशन लेटर में ‘तथाकथित नियुक्ति’ शब्द लिखकर विवि ने जो उनकी मानहानि की और उनके बच्चों का भविष्य बर्बाद किया, उसके बदले विवि ₹10 करोड़ का मुआवजा दे।
फर्जी पीएचडी रद्द हो: नियमों को ताक पर रखकर नाथ पंथ पर की गई डॉ. पद्मजा राव की पीएचडी और उनकी 2018 में हुई प्रवक्ता पद की नियुक्ति को तत्काल निरस्त किया जाए।
दोषियों पर FIR: यूजीसी नियमों की हत्या करने वाले भ्रष्ट विवि प्रशासन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।

डाक्टर संपूर्णानंद मल्ल पूर्वांचल गांधी (PHD दिल्ली)

​ ‘तिरंगा’ उठाकर लड़ेंगे आखिरी सांस तक
​डॉ. मल्ल ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अनशन के दौरान उनका स्वास्थ्य बिगड़ता है, तब भी वह पीछे नहीं हटेंगे और शौर्य, सत्य, समृद्धि का ‘तिरंगा’ उठाकर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। इस पत्र की कॉपियां सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों सहित गृह सचिव और गोरखपुर के आला अधिकारियों (SSP/DM) को भी भेज दी गई हैं।
​अब देखना यह है कि 10 जून के इस अल्टीमेटम के बाद राजभवन और विवि प्रशासन की नींद टूटती है या गोरखपुर यूनिवर्सिटी एक नए बड़े आंदोलन का गवाह बनती है।

​रिपोर्ट: के. एन. साहनी, गोरखपुर

UP की हर बड़ी खबर के लिए जुड़े रहिए सच्ची रिपोर्ट उत्तर प्रदेश’ के साथ।

Related Post

Leave a Comment