पूर्वांचल गांधी डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने कुलपति पर लगाए गंभीर आरोप, आंदोलन की चेतावनी

पूर्वांचल गांधी डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने कुलपति पर लगाए गंभीर आरोप, आंदोलन की चेतावनी


गोरखपुर। सत्यपथ, गोविंद नगरी, थाना शाहपुर निवासी एवं स्वयं को “पूर्वांचल गांधी” कहने वाले डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें पद से बर्खास्त करने तथा उनके विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की है।
डॉ. मल्ल ने राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन में कहा है कि यदि 30 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो वह “अहिंसक रिवॉल्यूशन” के रूप में सड़क पर तिरंगा लेकर आंदोलन करेंगे। साथ ही उन्होंने 10 जून से विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के समक्ष आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है।
ज्ञापन में उन्होंने बीटेक छात्र घनेंद्र चौधरी की आत्महत्या का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इंटरनल असेसमेंट में शून्य अंक दिए जाने जैसी घटनाएं “एकेडमिक क्राइम” और “एकेडमिक फासिज्म” को दर्शाती हैं।
डॉ. मल्ल ने विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में सागौन के पेड़ों की कटाई पर भी आपत्ति जताई और इसे पर्यावरण एवं मानवता के खिलाफ कदम बताया। उन्होंने कहा कि चमकदार सड़कें, भव्य गेट और अन्य निर्माण कार्यों के लिए हजारों पेड़ों की कटाई कर दी गई, जबकि इससे शिक्षा एवं शोध गुणवत्ता का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न धार्मिक एवं वैचारिक कार्यक्रमों के आयोजन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा और शोध गुणवत्ता को बढ़ाना होना चाहिए।
डॉ. मल्ल ने प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग (AHAC) की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि विभाग में पुरातत्व विषय लगभग समाप्ति की कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने स्वयं को विभाग का प्रथम श्रेणी स्कॉलर, जेआरएफ एएसआई तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से पुरातत्व विषय में पीएचडी धारक बताते हुए प्रोफेसर पद पर पुनर्बहाली की मांग दोहराई।
उन्होंने दावा किया कि उनकी पुस्तक “पुरातत्व की अनुसंधान प्रणाली” देश के कई विश्वविद्यालयों में पीजी पाठ्यक्रम की संदर्भ पुस्तक के रूप में प्रयुक्त हो रही है। साथ ही विभाग में विगत वर्षों में हुई नियुक्तियों, प्रोन्नतियों एवं शोध कार्यों की सीबीआई जांच कराने की मांग भी उठाई।
ज्ञापन की प्रतिलिपि भारत के मुख्य न्यायाधीश, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, मानव संसाधन विकास मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश, मुख्य सचिव, डीजीपी, आयुक्त, जिलाधिकारी एवं एसएसपी गोरखपुर सहित अन्य अधिकारियों को भेजी गई है।

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