नई दिल्ली / गोरखपुर | रिपोर्ट: के. एन. साहनी

विश्व पटल पर गहराते युद्ध के बादलों और मध्य-पूर्व (इजरायल-ईरान) में जारी तनाव के बीच, भारत के ‘पूर्वांचल गांधी’ के नाम से विख्यात डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने एक साहसी और वैश्विक पहल की मांग की है। गोरखपुर के शाहपुर स्थित ‘शांतिवन शोध पुस्तकालय’ से जारी एक पत्र में उन्होंने भारत की राष्ट्रपति महामहिम द्रौपदी मुर्मू से अंतर्राष्ट्रीय शांति और घरेलू प्रशासनिक सुधारों को लेकर कई गंभीर अपीलें की हैं।
UNO और वैश्विक महाशक्तियों को ‘शांति हथियार’ का संदेश
डॉ. मल्ल ने वैश्विक युद्ध (विशेषकर हालिया घटनाओं जिसमें अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उपजे तनाव का जिक्र है) पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल भारत के पास ‘बुद्ध’ और ‘गांधी’ का ‘शांति हथियार’ है। उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की है कि:
- शांति दल का गठन: सोनिया गांधी, आनंदीबेन पटेल, नजमा हेपतुल्ला और ममता बनर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं का एक ‘शांति दल’ तुरंत संयुक्त राष्ट्र (UNO), अमेरिका, इजरायल और ईरान भेजा जाए।
- पीस एक्सपीडिशन: उन्होंने सवाल उठाया कि 1 मार्च से उनके द्वारा प्रस्तावित ‘शांति अभियान’ को अब तक पश्चिम की ओर क्यों नहीं भेजा गया?
सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक नेतृत्व पर सवाल
पत्र में वर्तमान कूटनीति पर प्रहार करते हुए डॉ. मल्ल ने मांग की है कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्थान पर सुब्रमण्यम स्वामी या नीतीश कुमार को नेतृत्व सौंपा जाए। उन्होंने तर्क दिया कि इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते युद्ध की जड़ें हालिया कूटनीतिक यात्राओं और निर्णयों में छिपी हैं, जिससे मानवता खतरे में पड़ गई है।
‘फ्यूल लॉकडाउन’ और सादगी का ‘गांधीवादी’ मॉडल
घरेलू स्तर पर संसाधनों की लूट और पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्होंने एक क्रांतिकारी ‘फ्यूल लॉकडाउन’ का प्रस्ताव दिया है:
- VVIP संस्कृति पर प्रहार: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रियों, राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों के विमानों और हजारों गाड़ियों के काफिलों पर तुरंत ‘सेंसर’ लगाया जाए।
- अनिवार्य सार्वजनिक परिवहन: देश के बड़े नेताओं और लुटेरों को हवाई यात्रा के बजाय बस, ट्रेन और सार्वजनिक साधनों से यात्रा करने के लिए बाध्य किया जाए।
- अधिकारियों के लिए निर्देश: दफ्तरों में काम करने वाले अधिकारी-कर्मचारी टेंपो, बस, जीप, साइकिल या अधिकतम मोटरसाइकिल का उपयोग करें।
सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की उम्मीद
डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने इस पत्र की प्रतिलिपि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भी प्रेषित की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो मानवता युद्ध की विभीषिका में दफन हो जाएगी।
‘पूर्वांचल गांधी’ की इस बेबाक अपील ने न केवल दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी ‘विश्व शांति’ और ‘सादगीपूर्ण राजनीति’ की नई बहस छेड़ दी है।

© के. एन. साहनी न्यूज़ नेटवर्क | दिल्ली