जिउतिया पर मां की आंखों के सामने छिन गया लाल, रातभर चले सर्च अभियान के बाद मिला 10 वर्षीय प्रिंस का शव
कुशीनगर में पहली बार रातभर चला सर्च अभियान, SRDF टीम की मेहनत रंग लाई
कसया, कुशीनगर। जिउतिया पर्व पर मां अपने पुत्र की लंबी उम्र और सलामती की कामना के लिए व्रत रख रही थी। उसे क्या पता था कि जिस बेटे के लिए वह प्रार्थना कर रही है, उसी पर्व पर एक दर्दनाक हादसा उसकी दुनिया उजाड़ देगा। राजवाबर नदी में नहाने गए 10 वर्षीय बालक प्रिंस कुशवाहा की डूबने से मौत हो गई। मासूम के शव की तलाश में कुशीनगर में पहली बार रातभर सर्च अभियान चलाया गया, जिसमें SRDF टीम को सफलता मिली।

मृतक प्रिंस कुशवाहा (10) पुत्र रामकृपाल कुशवाहा, निवासी वार्ड नंबर-2, मां कोटेश्वरी नगर (बिशुनपुरवा), पोस्ट कर्मेनी प्रेमवलिया, थाना कसया, कुशीनगर बताया गया है।
बताया गया कि जिउतिया पर्व पर महिलाएं राजवाबर नदी में स्नान करने गई थीं। प्रिंस भी उनके साथ गया था। इसी दौरान वह नदी के गहरे पानी में चला गया और डूब गया। हादसे के बाद परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। स्थानीय लोगों ने बालक की तलाश शुरू की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट जी. अक्षय दीपक (IAS) ने तत्काल संज्ञान लिया। उनकी निगरानी में नायब तहसीलदार राहुल खरवार सहित राजस्व एवं पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं खोज अभियान को तेज कराया। बालक की तलाश के लिए SRDF टीम को लगाया गया।
कुशीनगर में पहली बार किसी ऐसे नदी हादसे में रातभर सर्च अभियान चलाया गया। अंधेरे और नदी के तेज बहाव के बावजूद टीम ने पूरी रात अभियान जारी रखा। सुबह भी तलाश जारी रही और आखिरकार कोल्ड स्टोर अड्डा के पास नदी से करीब दोपहर 12 बजे प्रिंस का शव बरामद कर लिया गया।

शव मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां और परिजनों की चीख-पुकार से मौके का माहौल बेहद मार्मिक हो गया। जिस मासूम को परिवार कुछ घंटे पहले तक अपने बीच देख रहा था, वही अब निर्जीव अवस्था में सामने था।
थानाध्यक्ष इत्यांनद पाण्डेय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जिउतिया पर्व पर हुई इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। जिस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए व्रत रख रही थीं, उसी दिन प्रिंस की मौत ने उसके परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए मातम में बदल दिया।
