योगी सरकार में भी पात्र लोग आयुष्मान कार्ड के लिए भटक रहे
गरीब मरीजों को नहीं मिल पा रहा योजना का लाभ, व्यवस्था पर उठे सवाल

कुशीनगर। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जनपद कुशीनगर में अनेक पात्र और जरूरतमंद लोग आज भी आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार सुविधा देने का प्रावधान है। बावजूद इसके, कई ग्रामीण परिवार आज भी सूची में नाम जुड़वाने और कार्ड बनवाने के लिए जनसेवा केंद्रों एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
बीमार परिवारों की बढ़ी परेशानी
ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को समय पर कार्ड न बनने के कारण निजी अस्पतालों में भारी खर्च वहन करना पड़ रहा है। कई परिवार कर्ज लेकर इलाज कराने को मजबूर हैं।
अपात्रों को लाभ मिलने की शिकायत
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आर्थिक रूप से सक्षम एवं प्रभावशाली व्यक्तियों के कार्ड आसानी से बन गए, जबकि वास्तविक पात्र गरीब परिवार वंचित रह गए। इससे चयन प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
पुनः सर्वे और जांच की मांग
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि पात्रता सूची का पुनः सत्यापन कराया जाए और वास्तविक लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर योजना से जोड़ा जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
यदि प्रशासन शीघ्र प्रभावी कदम उठाए, तो सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच सकती है।
