एक भारत, एक संविधान’ के तहत सभी के लिए ‘एक ट्रेन’ व्यवस्था लागू हो: डॉ. संपूर्णानंद मल्ल

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‘एक भारत, एक संविधान’ के तहत सभी के लिए ‘एक ट्रेन’ व्यवस्था लागू हो: डॉ. संपूर्णानंद मल्ल

पूर्वांचल गांधी ने रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड को भेजा ज्ञापन, वंदे भारत का किराया सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों के बराबर करने की मांग

वरिष्ठ नागरिकों को 50 से 100 प्रतिशत तक छूट, पत्रकारों को निःशुल्क यात्रा और जनरल-स्लीपर कोच बढ़ाने की उठाई आवाज

रेलवे के निजीकरण और परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण पर रोक लगाने की भी मांग, राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को भेजी ज्ञापन की प्रतिलिपि

गोरखपुर। भारतीय रेल में आम नागरिकों को समान अवसर, किफायती यात्रा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर पूर्वांचल गांधी डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड का ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने ‘एक भारत, एक संविधान’ की मूल भावना का हवाला देते हुए भारतीय रेल में समानता पर आधारित व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक, गोरखपुर के माध्यम से रेल मंत्री एवं रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष को ज्ञापन भेजकर रेल किराये में राहत देने, वरिष्ठ नागरिकों को विशेष छूट प्रदान करने, पत्रकारों को निःशुल्क यात्रा की सुविधा देने तथा सामान्य और स्लीपर श्रेणी के कोचों की संख्या बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई हैं।

डॉ. मल्ल का कहना है कि भारतीय रेल देश के करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था है। विद्यार्थी, किसान, मजदूर, कर्मचारी, व्यापारी, नौकरीपेशा लोग, वरिष्ठ नागरिक और छोटे-बड़े व्यवसायों से जुड़े लोग अपनी जरूरतों के अनुसार रेल यात्रा करते हैं। ऐसे में रेल व्यवस्था का उद्देश्य केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना ही नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक क्षमता और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुलभ एवं सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना भी होना चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है, तो सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की जरूरतों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जानी चाहिए? उन्होंने आधुनिक रेल सुविधाओं को अधिक से अधिक आम यात्रियों तक पहुंचाने और किराये के बोझ को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता बताई।

वंदे भारत का किराया सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों के बराबर करने की मांग

डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने अपने ज्ञापन में वंदे भारत जैसी आधुनिक एवं प्रीमियम श्रेणी की ट्रेनों के किराये को सामान्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के अनुरूप निर्धारित करने की मांग की है। उनका मानना है कि आधुनिक रेल तकनीक और बेहतर यात्री सुविधाओं का लाभ केवल अधिक किराया वहन करने में सक्षम यात्रियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्हें रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार और पारिवारिक कार्यों के लिए नियमित रूप से यात्रा करनी पड़ती है। यदि आधुनिक ट्रेनों का किराया सामान्य यात्रियों की पहुंच के अनुरूप रखा जाए, तो अधिक लोगों को इन सुविधाओं का लाभ मिल सकता है।

उनकी मांग है कि रेलवे ऐसी किराया नीति पर विचार करे, जिससे यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं भी मिलें और उन पर आर्थिक बोझ भी कम पड़े। इससे आम आदमी के लिए तेज और सुविधाजनक रेल यात्रा का विकल्प अधिक सुलभ हो सकता है।

हालांकि, वंदे भारत ट्रेनों का किराया सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों के बराबर करने का प्रस्ताव रेलवे की मौजूदा किराया व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव की मांग करता है। इस पर निर्णय लेने के लिए रेलवे को परिचालन लागत, यात्री सुविधाओं और आर्थिक व्यवहार्यता जैसे पहलुओं पर विचार करना होगा।

वरिष्ठ नागरिकों को मिले 50 से 100 प्रतिशत तक किराये में छूट

ज्ञापन में वरिष्ठ नागरिकों को रेल किराये में विशेष राहत देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। डॉ. मल्ल ने 60 से 80 वर्ष तक के वरिष्ठ नागरिकों को रेल किराये में 50 प्रतिशत छूट देने तथा 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को 100 प्रतिशत छूट के साथ निःशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है।

उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के लिए रेल यात्रा अक्सर पारिवारिक, धार्मिक और चिकित्सकीय जरूरतों से जुड़ी होती है। उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में इलाज, जांच, दवा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए दूसरे शहरों की यात्रा करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को किराये में राहत मिलना उनके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।

डॉ. मल्ल के अनुसार, जीवन के लंबे समय तक परिवार और समाज के लिए योगदान देने वाले बुजुर्गों को सम्मानजनक एवं सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना जनकल्याण की भावना के अनुरूप होगा। उन्होंने रेलवे से वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक स्थिति और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष छूट की व्यवस्था पर विचार करने की अपील की।

यह मांग ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेल किराये में रियायत की बहाली को लेकर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है। डॉ. मल्ल चाहते हैं कि आयु के आधार पर बुजुर्गों को स्पष्ट और प्रभावी आर्थिक राहत उपलब्ध कराने की नीति बनाई जाए।

सभी पत्रकारों को निःशुल्क रेल यात्रा की सुविधा देने की मांग

डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने पंजीकृत और गैर-पंजीकृत सभी पत्रकारों को निःशुल्क रेल यात्रा की सुविधा देने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि पत्रकार लोकतंत्र में जनसमस्याओं को सामने लाने, सरकारी योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पत्रकारों को समाचार संकलन के लिए कई बार अपने कार्यक्षेत्र से बाहर जाना पड़ता है। उन्हें दुर्घटनाओं, प्राकृतिक आपदाओं, जनसमस्याओं, सरकारी कार्यक्रमों और सार्वजनिक महत्व की घटनाओं की जानकारी जुटाने के लिए अलग-अलग स्थानों की यात्रा करनी पड़ती है। ऐसे में यात्रा व्यय पत्रकारिता से जुड़े लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण खर्च हो सकता है।

डॉ. मल्ल ने मांग की है कि पत्रकारों की कार्यप्रकृति और जनहित में उनकी भूमिका को ध्यान में रखते हुए सभी पत्रकारों के लिए निःशुल्क रेल यात्रा की सुविधा पर विचार किया जाए। उनके प्रस्ताव में पंजीकृत पत्रकारों के साथ गैर-पंजीकृत पत्रकारों को भी शामिल करने पर जोर दिया गया है, ताकि पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय लोगों के बीच सुविधा को लेकर भेदभाव न हो।

इस मांग पर अमल के लिए पत्रकारों की पहचान, पात्रता और यात्रा के उद्देश्य से संबंधित स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाने की आवश्यकता होगी। फिलहाल यह सुविधा ज्ञापन के माध्यम से उठाई गई मांग है, न कि लागू हो चुकी व्यवस्था।

रेलवे के निजीकरण और पीपीपी व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग

ज्ञापन में रेलवे के निजीकरण, सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल तथा रेलवे की परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।

डॉ. मल्ल का तर्क है कि भारतीय रेल देश की एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा है। इसका उपयोग समाज के लगभग सभी वर्ग करते हैं। इसलिए रेलवे की नीतियों में सार्वजनिक हित, आम यात्रियों की आर्थिक क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

उनका मानना है कि रेलवे की व्यवस्था में ऐसे बदलाव नहीं होने चाहिए, जिनसे भविष्य में सामान्य यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका हो। उन्होंने रेल मंत्रालय से आग्रह किया कि रेलवे से संबंधित नीतिगत निर्णय लेते समय आम जनता के हितों और सार्वजनिक परिवहन की उपयोगिता को केंद्र में रखा जाए।

रेलवे के निजीकरण और पीपीपी व्यवस्था को लेकर देश में अलग-अलग मत रहे हैं। एक ओर आधुनिक सुविधाओं और निवेश की जरूरत पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच, किराये और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। डॉ. मल्ल ने अपने ज्ञापन में सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देते हुए निजीकरण संबंधी प्रक्रियाओं पर रोक लगाने की मांग की है।

जनरल और स्लीपर कोचों की संख्या बढ़ाने पर जोर

आम यात्रियों की समस्याओं को देखते हुए डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने ट्रेनों में जनरल और स्लीपर श्रेणी के कोचों की संख्या बढ़ाने की मांग भी की है। उनका कहना है कि कम आय वाले यात्रियों, मजदूरों, छोटे कारोबारियों, विद्यार्थियों और नौकरी की तलाश में यात्रा करने वाले लोगों के लिए ये श्रेणियां विशेष महत्व रखती हैं।

त्योहारों, छुट्टियों और विशेष अवसरों पर ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने से आरक्षित टिकट प्राप्त करना कठिन हो सकता है। सामान्य श्रेणी के यात्रियों को भीड़ और सीमित उपलब्धता जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जनरल एवं स्लीपर कोचों की पर्याप्त उपलब्धता यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो सकती है।

डॉ. मल्ल ने रेलवे से मांग की है कि यात्री संख्या, मार्गों पर भीड़ और स्थानीय जरूरतों का आकलन कर ट्रेनों में इन श्रेणियों के कोच बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जाएं। इससे सामान्य यात्रियों को यात्रा के दौरान बेहतर सुविधा मिल सकती है और कम खर्च में आवागमन का विकल्प मजबूत हो सकता है।

उनका जोर इस बात पर है कि रेलवे के आधुनिकीकरण के साथ-साथ उन यात्रियों की जरूरतों की भी अनदेखी नहीं होनी चाहिए, जिनके लिए किफायती यात्रा सबसे महत्वपूर्ण है।

‘रेलवे केवल परिवहन का साधन नहीं, करोड़ों लोगों की जीवनरेखा’

डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने कहा कि भारतीय रेल देश की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण आधार है। इसके माध्यम से लोग रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार, धार्मिक यात्राओं और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए आवागमन करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों के लोगों के लिए रेल सेवा विशेष महत्व रखती है।

उन्होंने कहा कि रेल नीति बनाते समय यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि देश के आर्थिक रूप से कमजोर नागरिक भी सम्मानपूर्वक यात्रा कर सकें। रेलवे में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है, लेकिन इसके साथ सामान्य यात्रियों के लिए किफायती यात्रा की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उनके अनुसार, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की सफलता का आकलन केवल तेज गति वाली ट्रेनों या आधुनिक सुविधाओं से नहीं, बल्कि इस बात से भी होना चाहिए कि आम नागरिक उन सुविधाओं का कितना लाभ उठा पा रहे हैं।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी भेजी गई ज्ञापन की प्रतिलिपि

डॉ. मल्ल ने अपनी मांगों को व्यापक जनहित से जुड़ा बताते हुए ज्ञापन की प्रतिलिपि महामहिम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी भेजी है। इसके माध्यम से उन्होंने केंद्र सरकार और रेलवे के संबंधित अधिकारियों से रेल किराये में राहत, वरिष्ठ नागरिकों को विशेष सुविधाएं, पत्रकारों के लिए यात्रा संबंधी रियायत तथा सामान्य यात्रियों की जरूरतों के अनुरूप रेल सेवाओं का विस्तार करने पर विचार करने की अपील की है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि रेलवे प्रशासन इन मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और आम यात्रियों की समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

अब रेल मंत्रालय के निर्णय पर टिकी निगाहें

डॉ. संपूर्णानंद मल्ल की ओर से उठाई गई मांगों में रेल किराये में समानता, वरिष्ठ नागरिकों को राहत, पत्रकारों के लिए यात्रा सुविधा, जनरल-स्लीपर कोचों का विस्तार और रेलवे की सार्वजनिक प्रकृति को बनाए रखने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

इन मांगों पर निर्णय लेना रेल मंत्रालय और संबंधित रेलवे प्राधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रेल मंत्रालय एवं रेलवे बोर्ड इन प्रस्तावों पर क्या रुख अपनाते हैं और आम यात्रियों को राहत देने के लिए किस प्रकार की नीतिगत पहल करते हैं।

जनहित से जुड़ा सवाल यही है कि भारतीय रेल के आधुनिकीकरण के साथ-साथ यात्रा को आम नागरिक की आर्थिक पहुंच में बनाए रखने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जाएंगे?

के.एन. साहनी
एडिटर

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